शनिवार, नवंबर 26, 2011

अष्टावक्र गीता वाणी ध्वनि स्वरूप - 37


जनक उवाच -  प्रकृत्या शून्यचित्तो यः प्रमादाद भावभावनः । निद्रितो बोधित इव क्षीणसंस्मरणो हि सः । 14-1
जनक बोले -  जो स्वभाव से ही विचार शून्य है । और शायद ही कभी कोई इच्छा करता है । वह पूर्व स्मृतियों से उसी प्रकार मुक्त हो जाता है । जैसे कि नींद से जागा हुआ व्यक्ति अपने सपनों से । 1
 क्व धनानि क्व मित्राणि क्व मे विषयदस्यवः । क्व शास्त्रं क्व च विज्ञानं यदा मे गलिता स्पृहा । 14-2
 जब मैं । कोई इच्छा नहीं करता । तब मुझे धन । मित्रों । विषयों । शास्त्रों और विज्ञान से क्या प्रयोजन है । 2
 विज्ञाते साक्षिपुरुषे परमात्मनि चेश्वरे । नैराश्ये बंधमोक्षे च न चिंता मुक्तये मम । 14-3
 साक्षी पुरुष रूपी । परमात्मा या ईश्वर को । जानकर मैं बंधन और मोक्ष से । निरपेक्ष हो गया हूँ । और मुझे मोक्ष की चिंता भी नहीं है । 3
अंतर्विकल्पशून्यस्य बहिः स्वच्छन्दचारिणः । भ्रान्तस्येव दशास्तास्तास्तादृशा एव जानते । 14-4
आतंरिक इच्छाओं से रहित । बाह्य रूप में चिंता रहित । आचरण वाले । प्रायः मत्त पुरुष जैसे ही दिखने वाले प्रकाशित पुरुष अपने जैसे प्रकाशित पुरुषों द्वारा ही पहचाने जा सकते हैं । 4
अष्टावक्र त्रेता युग के महान आत्मज्ञानी सन्त हुये । जिन्होंने जनक को कुछ ही क्षणों में आत्म साक्षात्कार कराया । आप भी  इस दुर्लभ गूढ रहस्य को इस वाणी द्वारा आसानी से जान सकते हैं । इस वाणी को सुनने के लिये नीचे बने नीले रंग के प्लेयर के प्ले > निशान पर क्लिक करें । और लगभग 3-4 सेकेंड का इंतजार करें । गीता वाणी सुनने में आपके इंटरनेट कनेक्शन की स्पीड पर उसकी स्पष्टता निर्भर है । और कम्प्यूटर के स्पीकर की ध्वनि क्षमता पर भी । प्रत्येक वाणी 1 घण्टे से भी अधिक की है । इस प्लेयर में आटोमेटिक ही वाल्यूम 50% यानी आधा होता है । जिसे वाल्यूम लाइन पर क्लिक करके बढा सकते हैं । इस वाणी को आप डाउनलोड भी कर सकते हैं । इसके लिये प्लेयर के अन्त में स्पीकर के निशान के आगे एक कङी का निशान या लेटे हुये  8 जैसे निशान पर क्लिक करेंगे । तो इसकी लिंक बेवसाइट खुल जायेगी । वहाँ डाउनलोड आप्शन पर क्लिक करके आप इस वाणी को अपने कम्प्यूटर में डाउनलोड कर सकते हैं । ये वाणी न सिर्फ़ आपके दिमाग में अब तक घूमते रहे कई प्रश्नों का उत्तर देगी । बल्कि एक  मुक्तता का अहसास भी करायेगी । और तब हर कोई अपने को बेहद हल्का और आनन्द युक्त महसूस करेगा ।

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