बुधवार, जून 30, 2010

आईये खुद को जानें ।

1--आत्मा- जिसके पहचान के लिये इच्छा,द्वेष,सुख,दुख,ग्यान और प्रयत्न लिंग हैं यही भोगता है । यही निर्लेप भी है । इसी का सारा खेल है । ग्यान दृष्टि होने पर बंध मोक्ष मन का धर्म है ।
2--शरीर- जो चेष्टा,इंद्रियों और अर्थों का आश्रय है ।और भोग का स्थान है । बाह्य रूप में यह स्थूल है ।
3--इंद्रिय-आंख,नाक,कान,जीभ,त्वचा जिसके उपादान कारण प्रथ्वी,जल,अग्नि,वायु,आकाश हैं ।
ये भोग के साधन हैं । या ग्यानेन्द्रियां हैं ।
4--अर्थ या विषय-रस,रूप,गंध,स्पर्श,और शब्द हैं जो पांचो इंद्रियो के भोगने के विषय और पांच भूतों के यथायोग्य गुण भी हैं । मनुष्य में ये पाँचो होते हैं । अन्य जीवों में एक ही अधिक होता है ।
5--बुद्धि, ग्यान,उपलब्धि-ये तीनों पर्याय शब्द हैं.विषयों को भोगना या अनुभव करना बुद्धि है ।
6--मन-- जिसका लिंग एक से अधिक ग्यानेन्द्रियों से एक समय में ग्यान न होना है । जो सारी इन्द्रियों
का सहायक है । और सुख दुख आदि का अनुभव कराता है । पच्चीस प्रकृतियां । पाँच ग्यानेन्द्रियां । पाँच कर्मेंन्द्रियां । पाँच तत्वों के शरीर का राजा ये मन है ।
7--प्रवृति-- मन वाणी और शरीर से कार्य का आरम्भ होना प्रवृति है ।
8--दोष-- प्रवृत करना । जिनका लक्षण होता है । ये मोह राग द्वेश तीन दोष हैं ।
9--प्रेतभाव-- पुनर्जन्म अर्थात सूक्ष्म शरीर का एक शरीर को छोङकर दूसरे को धारण करना प्रेतभाव है । गीता में कृष्ण ने कहा था " हे अर्जुन सब भूतों में मैं ही स्थित हूँ । "
10--फ़ल--प्रवृत और दोष से जो अर्थ उत्पन्न हो । उसे फ़ल कहते हैं । फ़ल दो प्रकार का होता है ।
एक- मुख्य । दूसरा- गौण । मुख्य फ़ल में सुख दुख के अनुभव आते हैं । और गौण फ़ल में सुख दुख के साधन
शरीर इन्द्रियां विषय आदि का समावेश होता है ।
11-- दुख-- जिसका लक्षण पीङा होता है । सुख भी दुख के अंतर्गत है । क्योंकि सुख विना दुख के रह नहीं सकता । एक के बाद दूसरे का आना तय है । जैसे दिन के बाद रात और जीवन के मृत्यु निश्चित है ।
12--अपवर्ग-- दुख की निवृति हो जाना । ब्रह्म की प्राप्ति हो जाना । ग्यान की प्राप्ति । या सृष्टि से अलग ग्यान में प्रविष्ट को अपवर्ग कहते हैं ।
" जाकी रही भावना जैसी । हरि मूरत देखी तिन तैसी । " " सुखी मीन जहाँ नीर अगाधा । जिम हरि शरण न एक हू बाधा । " विशेष--अगर आप किसी प्रकार की साधना कर रहे हैं । और साधना मार्ग में कोई परेशानी आ रही है । या फ़िर आपके सामने कोई ऐसा प्रश्न है । जिसका उत्तर आपको न मिला हो । या आप किसी विशेष उद्देश्य हेतु
कोई साधना करना चाहते हैं । और आपको ऐसा लगता है कि यहाँ आपके प्रश्नों का उत्तर मिल सकता है । तो आप निसंकोच सम्पर्क कर सकते हैं ।

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