शुक्रवार, अप्रैल 30, 2010

ना मैं किरिया करम में रहता

मोको कहां ढूंढे रे बन्दे मैं तो तेरे पास मेंना तीरथ मे ना मूरत में ना एकान्त निवास मेंना मंदिर में ना मस्जिद में ना काबे कैलास मेंमैं तो तेरे पास में बन्दे मैं तो तेरे पास मेंना मैं जप में ना मैं तप में ना मैं बरत उपास मेंना मैं किरिया करम में रहता नहिं जोग सन्यास मेंनहि प्राण में नहि पिंड में ना ब्रह्याण्ड आकाश मेंना मैं प्रकुति प्रवार गुफा में नहिं स्वांसों की स्वांस मेंखोजि होए तुरत मिल जाउं इक पल की तालास मेंकहत कबीर सुनो भई साधो मैं तो हूं विश्वास में

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