शुक्रवार, अप्रैल 30, 2010

यह संसार कागद की पुडि़या

रहना नहीं देस बिराना है।
यह संसार कागद की पुडि़या बूंद पड़े घुल जाना है।
यह संसार कांट की बाड़ी उलझ पुलझ मर जाना है।
यह संसार झाड़ और झांखर आग लगे बर जाना है।
कहत कबीर सुनो भाई साधो सतगुरू नाम ठिकाना है।

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