बुधवार, अप्रैल 07, 2010

कोई तो बात होगी ही..??..

अगर हम साधारण नजरिये से बात करें तो फ़िर तो कोई
बात ही नहीं पर विशेष नजरिये से देखने पर यह बात अलग हो जाती है आप देखिये शास्त्रों में धर्मग्रन्थों में संतों को सबसे अधिक पूज्यनीय बताया है पर आज आप किसी से संत के बारे में बात करो तो वो नाक भों सिकोङ लेता है और अर्नगल भी बोल सकता है . और ये सच है कि बोलने वाले की संत के बारे में जो राय है एकदम सटीक हो सकती है ये बात अलग है कि आप सही संत को नहीं जानते . संत के लक्षणों को नहीं जानते तो फ़िर कुछ दोष तो आपका भी हुआ कि नहीं . कबीर साहेब ने संतों के बारे में कहा है कि गांठी दाम न बांधहिं
नहिं नारी से नेह . कह कबीर उन संत की हम लें चरनन की खेह तो ये मजाक बात नहीं है कि आप संतों के ऊपर कोई कमेंट कर सकें .हाँ जिन के ऊपर आप कमेंट करते हैं वे दरअसल संत हैं ही नहीं और आप संत कौन होते हैं ये न जानते हुये सबको एक ही तराजू में तौल देते हैं . मैं उन लोंगों से पूछता हूँ कि जब आप किसी संत के पास गये थे तब क्या आप जानते थे कि संतो के पास क्यों जाते है . संत होने की पहचान क्या है . संत अपने प्रवचन में क्या कह रहा है . आप को उसके पास जाने से क्या नुकसान या क्या फ़ायदा हुआ..जाहिर है इन बातों को अक्सर लोग कम देखते है .
एक बहुत शिक्षित आदमी का कमेंट मुझे लग रहा है कि आपको बताना चाहिये . उसने कहा कि बाबा( एक नामी संत जो टी.वी. पर भी आते हैं और लाखों की संख्या में उनके शिष्य हैं ) के पास लाखों लोग जाते हैं तो कोई तो बात होगी ही . मेरे पूछने पर उन्होने बताया कि अभी तक तो मुझे कोई लाभ नही हैं ..हाँ मैं लगभग पाँच साल से जुङा हूँ ..दरअसल मैं ध्यान के लिये समय ही नही दे पाता..? मैं संतों (वास्तविक ) की संगति में बीस साल से हूँ आप यकीन मानिये कि ये बाबा और ये आदमी दोनों ही अपनी अपनी जगह गलत है . न तो इस तरह शिष्य बनाये जातें हैं और न ही इस तरह गुरु का कोई मतलब होता है . लेकिन मैं शिष्य से अधिक गलती गुरु की मानता हूँ . मैं आपको बताऊँ गुरु उसी मन्त्र की दीक्षा देने का अधिकारी होता है जो कि उसने स्वयं जपा हो और उस मन्त्र उस ग्यान की दीक्षा देने का अधिकारी नियुक्त हुआ हो . लेकिन इस तरह के असली गुरु को थोक में दीक्षा बाँटने का कोई शौक नहीं होता और उसका दीक्षा देने का आज की तरह का फ़ेसनेबल तरीका नहीं होता और ये दीक्षा कुछ ही दिनों में असर दिखाने लगती है यानी आपको अलौकिक अनुभव होने लगते हैं . आप सच्चे संत से मिलना चाहते हैं मैं आपको इसका बेजोङ तरीका बताता हूँ . आप सब बातों से ध्यान हटाकर अधिक से अधिक समय अपने मन में ये लगन पैदा करें कि हे प्रभु आप मुझे किसी ऐसे संत से मिलाये जो आपके दर्शन कराने में समर्थ हो.. फ़िर देखिये आप विश्व के किसी भी कोने में हो किसी न किसी तरीके से आप को संत मिल जायेंगे . पर आपका भाव सच्चा और पवित्र , प्रेममय होना चाहिये .
राम कबीरा एक हैं , कहन सुनन को दोय दोय कर सो जाने , जे सतगुरु मिला न होय
पंचे सबद अनाहद बाजे संगे सारिगपानी कबीर दास तेरी आरति कीनी निरंकार निरवानी
साधो सबद साधना कीजे जेहि सबद से परगट भये सब ,सोइ सबद गहि लीजे
गुरु सोई जो शबद सनेही , शबद बिना दूसरि नहि सेई शबद कमावे सो गुरु पूरा , उन चरनन की हो जा धूरा
और पहचान करो मत कोई, लक्ष अलक्ष न देखो सोई शब्द भेद लेकर तुम उनसे ,शब्द कमाओ तुम तन मन से
कह नानक जिस सतगुरु पूरा, बाजे ताके अनहद तूरा सबद भेद तुम गुरु से पाओ, सबद माहिं फ़िर जाहि समाओ

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