शुक्रवार, अप्रैल 30, 2010

गइ ठगौरी जब ठग पहिचाना


शब्द 36

हरि ठग जगत ठगौरी लाई, हरि के वियोग कस जियेहु रे भाई ।
को काको पुरुष कवन काको नारी, अकथ कथा यम दृष्टि पसारी
को काको पुत्र कवन काको बापा, को रे मरै को सहै संतापा ।
ठगि ठगि मूल सबन को लीन्हा, राम ठगौरी काहु न चीन्हा ।
कहैं कबीर ठग सो मन माना, गइ ठगौरी जब ठग पहिचाना ।

शब्द 37

हरि ठग ठगत सकल जग डोलै । गवन करत मोसे मुषहु न बोले ।
बालापन के मीत हमारे । हम कहँ तजि कहँ चलेहु सकारे ।
तुमहिं पुरुष मैं नारि तुम्हारी । तुम्हरि चाल पाहनहूँ ते भारी ।
माटी की देह पवन का सरीरा । हरि ठग ठग सो डरे कबीरा?

शब्द 38

हरि बिनु भरम बिगुर बिनु गन्दा ।
जहँ जहँ गयेउ अपमपौ षोयेउ । तेहि फंदे बहु फंदा ।
योगी कहै योग है नीका । दुतिया और न भाई ।
चुंडित मुंडित मौन जटाधारी । तिनिहुँ कहाँ सिधि पाई ।
ग्यानी गुनी सूर कबि दाता । ई जो कहैं बड हमहीं ।
जहाँ से उपजे तहाँ समाने । छूटि गयल सब तबहीं?
बाँये दाहिने तेजु बिकारा । निजुकै हरि पद गहिया ।
कहैं कबीर गूंगे गुर षइया । पूछे सो क्या कहिआ ।

कोई टिप्पणी नहीं:

WELCOME

मेरी फ़ोटो
Agra, uttar pradesh, India
भारत के राज्य उत्तर प्रदेश के फ़िरोजाबाद जिले में जसराना तहसील के एक गांव नगला भादौं में श्री शिवानन्द जी महाराज परमहँस का ‘चिन्ताहरण मुक्तमंडल आश्रम’ के नाम से आश्रम है। जहाँ लगभग गत दस वर्षों से सहज योग का शीघ्र प्रभावी और अनुभूतिदायक ‘सुरति शब्द योग’ हँसदीक्षा के उपरान्त कराया, सिखाया जाता है। परिपक्व साधकों को सारशब्द और निःअक्षर ज्ञान का भी अभ्यास कराया जाता है, और विधिवत दीक्षा दी जाती है। यदि कोई साधक इस क्षेत्र में उन्नति का इच्छुक है, तो वह आश्रम पर सम्पर्क कर सकता है।