रविवार, अप्रैल 25, 2010

दीक्षा का सबसे बङा लाभ ये है

-- दीक्षा एक आदमी की हो सौ की हो हजार की अथवा
पाँच हजार की..दीक्षा के समय आपके सिर पर एक काला
कपङा या किसी भी गहरे रंग का कपङा होना चाहिये और
दीक्षा स्थान पर पर्याप्त अंधेरा होना चाहिये...दीक्षा के समय आपके दोनों हाथ की कोहनी किसी सहारा देने वाली चीज पर हों तथा एक एक उंगली कानों में तथा आंख और मुंह बन्द होना चाहिये..दीक्षा का समय एक घन्टा तक हो..दीक्षा वाले दिन किसी से मिलना जुलना नहीं चाहिये .
--मुक्ति या आत्मग्यान की दीक्षाएं अनेक नहीं है यह सिर्फ़
ढाई अक्षर के महामन्त्र से निर्वाणी ग्यान और हंस ग्यान
की दीक्षा है इसको देने का अधिकार सिर्फ़ सतगुरु को ही
है..खास बात ये है कि इसमें जो नाम देते हैं उसको राम या भगवते वासुदेवाय इस तरह वाणी से नहीं जपते हैं बल्कि एक विशेष जगह ध्यान केन्द्रित करना होता है ..यदि आपने पूरे कायदे से दीक्षा ली है तो उसी दिन आपका ग्यान नेत्र खुल जाता है जिसे तीसरा नेत्र भी कहते है .कुछ जड प्रकृति के साधकों को एक महीने के अभ्यास में अंतरजगत के द्रश्य दिखने लगते हैं .
इस दीक्षा का सबसे बङा लाभ ये है कि अब तक धर्म ग्रन्थों
में जो बाते आपको समझ में नहीं आती थी उनका बोध हो जाता है .
--दीक्षा का सबसे बङा लाभ ये है कि यदि आप किन्ही कारण वश साधना ठीक से नहीं कर पाये तो भी आप मनुश्य जन्म के अधिकारी हो जाते हैं और ये सिर्फ़ मुंहजबानी आपको भरमाया नहीं जाता आपको कुछ ऐसे अलोकिक अनुभव होते है जो आपकी समस्त शंकाओं का स्वयं समाधान करते है यदि आपको लगता है कि आपको अभी तक सतसंग से कुछ विशेष लाभ नहीं हुआ और आप ध्यान की ऊँचाई को पाना चाहते है जैसे शरीर से बाहर निकलना सूक्ष्मलोकों का भ्रमण करना तो आप सम्पर्क कर सकते है यहाँ ये बात उल्लेखनीय है कि मैं नहीं आप को ये सब
अनुभव कराऊंगा मैं तो सिर्फ़ आपको महाराज जी से मिलवा दूँगा जिनसे मैंने ये सुर्ति साधना का दुर्लभ ग्यान
पाया है . जय गुरुदेव की

1 टिप्पणी:

राजीव कुमार कुलश्रेष्ठ ने कहा…

मेरा ब्लागिंग का उद्देश्य गूढ और
दुर्लभ रहस्यों को बांटना और प्राप्त करना
है./ इसलिये आप यहाँ पर टिप्पणी के रूप
में कोई दुर्लभ ग्यान उपयोगी बात या जो
आप दूसरों के साथ शेयर करना चाहें पोस्ट
कर सकते हैं ..आपका सदेव स्वागत है

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