शुक्रवार, अप्रैल 30, 2010

क्यों सोया पैर पसार के तेरे सर पर मौत खङी है

क्यों सोया पैर पसार के तेरे सर पर मौत खङी है .
आज बात तू कहता कहाँ की थोङा सा दिन रह गया बाकी
कौङी टका पास नहि राखी चल दयो पगङी झार के
तोरी किसने बुद्धि हरी है...क्यों..
भौ सागर ये अगम अपारा कैसे नाव लगे उस पारा
ठाङे करते सोच विचारा नहि मल्लाह नहि गांव है
फ़िर बीते घङी घङी है...क्यों
आगे कठिन परत है झाङी कैसे राह मिलेगी सादरी
मती भूलना निपट अनाङी धरना पैर संभार के
पानी से नाव भरी है...क्यों
कह कबीर जम मांगे लेखा मानुष जन्म नही मिलने का
करनी घटी तो जमों घर देखा दिये नरक में डार के
मुगदर की मार परी है ...क्यों ..

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