शनिवार, अप्रैल 17, 2010

मामा हउवा कहाँ ते आई

                             रमैनी 40

आदम आदि सुद्धि नहिं पाई, मामा हउवा कहाँ ते आई?
तब नहिं होते तुरुक न हिंदू, माय के रुधिर पिता कै बिन्दू ।
तब नहिं होते गाय कसाई, तब बिसमिल्ला किन फरमाई ।
तब नहिं होते कुल औ जाती, दोजख भिस्त कौन उत्पाती ।
मन मसले का खबरि न जानी, मति भुलान दुइ दीन बखानी ।

संयोगे का गुण रबे, बिन जोगे गुण जाय ।
जिभ्या स्वाद के कारणे, कीन्हें बहुत उपाय ।

                          रमैनी 41

अंबुक रासि समुद्र कि खाई, रवि ससि कोटि तैंतिसो भाई ।
भंवर जाल में आसन माडा, चाहत सुख दुख संग न छाडा ।
दुख को मर्म न काहु पाया, बहुत भांति कै जग भरमाया?
आपुहि बाउर आपु सयाना, हृदय बसत राम नहिं जाना ।

तेही हरि तेहि ठाकुरा, तेही हरि के दास ।
ना यम भया न यामिनी, भामिन चली निरास ।

                         रमैनी 42

जब हम रहल रहल नहिं कोई, हमरे माहि रहल सब कोई ।
कहहू राम कौन तोरि सेवा, सो समुझाय कहहु मोहि देवा ।
फुर फुर कहौं मारु सब कोई, झूठहि झूठा संगति होई ।
आँधर कहे सभै हम देखा, तहँ दिठियार बैठ मुख पेखा ।
यहि बिधि कहों मानु जो कोई, जस मुख तस जौं हृदया होई ।
कहहिं कबीर हंस मुसकाई, हमरे कहल दुष्ट बहु भाई ।

                              रमैनी 43

जिन्ह जीव कीन्ह आपु बिस्वासा, नर्क गये तेहि नर्कहि वासा ।
आवत जात न लागे बारा, काल अहेरी सांझ सकारा ।
चौदह विद्या पढि समुझावै, अपने मरन की खबर न पावै ।
जाने जीव को परा अंदेसा, झूठहि आय कहाँ संदेसा ।
संगति छाडि करै असरारा, उबहै मोट नर्क के भारा ।

गुरुद्रोही औ मनमुखी, नारी पुरुष विचार ।
ते नर चौरासी भ्रमै, जब लो ससि दिनकार 

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Agra, uttar pradesh, India
भारत के राज्य उत्तर प्रदेश के फ़िरोजाबाद जिले में जसराना तहसील के एक गांव नगला भादौं में श्री शिवानन्द जी महाराज परमहँस का ‘चिन्ताहरण मुक्तमंडल आश्रम’ के नाम से आश्रम है। जहाँ लगभग गत दस वर्षों से सहज योग का शीघ्र प्रभावी और अनुभूतिदायक ‘सुरति शब्द योग’ हँसदीक्षा के उपरान्त कराया, सिखाया जाता है। परिपक्व साधकों को सारशब्द और निःअक्षर ज्ञान का भी अभ्यास कराया जाता है, और विधिवत दीक्षा दी जाती है। यदि कोई साधक इस क्षेत्र में उन्नति का इच्छुक है, तो वह आश्रम पर सम्पर्क कर सकता है।