बुधवार, अप्रैल 28, 2010

अलल पक्षी और चन्डूल पक्षी दो ऐसे दुर्लभ पक्षी है

अलल पक्षी और चन्डूल पक्षी दो ऐसे दुर्लभ पक्षी है जो संभवत संसार में कुछ ही लोग देख पाते होंगे इनमें चन्डूल पक्षी तो खैर काफ़ी लोंगो ने देखा होगा फ़िर भी इसे देखने
वालों की संख्या अधिक नहीं होती . चन्डूल पक्षी की खासियत ये होती है कि ये किसी भी आवाज की नकल कर लेता है चाहे वह पुरुष महिला या किसी जानवर या अन्य पक्षी या अन्य कोई भी जो आवाज है जैसी आवाज है उसकी वखूबी नकल कर लेता है . इसकी इस मक्कारी की वजह से कई बार लोग जंगलों
में मुसीवत में पङ गये क्योंकि इसने उन्ही में से किसी की आवाज की नकल कर अथवा कोई अन्य इतर आवाज वनाकर लोगों को
भ्रमित किया इसी लिये चान्डाल स्वभाव का मानने के कारण इसका नाम चन्डूल रखा गया .
अलल पक्षी एक ऐसा पक्षी है जो पेग्विन के समान बनाबट वाला होता है पर उससे कुछ छोटा होता है इस पक्षी को किसी विशेष कृपा से या विशेष संयोग से अरवों खरवों में एक दो आदमी ही देख पाते है क्योंकि यह मनुष्य की पहुँच से काफ़ी ऊपर अनन्त आकाश में रहता है और भोजन के रूप में शुद्ध वायु का सेवन करता है . इसका प्रजनन या मादा से संयोग दृष्टि के माध्यम से होता है और बाद में मादा अंडा देते समय निराधार आकाश में ही अंडा देती है क्योंकि इनका स्थान वायुमंडल से काफ़ी ऊंचाई पर होता है अतः अंडा नीचे आने लगता है और रास्ते में ही स्वतः परिपक्व हो जाता है और फ़ूट भी जाता है इसके बच्चे की और नीचे आते आते आँखे खुल जाती है और उसके पंख उङान के लिये तैयार हो जाते है और हमारी प्रथ्वी से सौ दो सौ फ़ुट ऊपर ही इसको स्वत पता लग जाता है कि ये (प्रथ्वी) उसका ठिकाना नहीं है
तव ये वापस अंतरिक्ष की ऊँचाईयों की ओर उङ जाता है और नस्ल विशेष गुण से ये अपनी माँ को पहचान लेता है..आप सोचेंगे कि फ़िर इस दुर्लभ पक्षी के वारे में जानकारी कैसे प्राप्त हुयी .ये दरअसल सूक्ष्म शरीर या सशरीर अंतरिक्ष में जाने वाले संतो या सिद्धों या अन्य महात्माओं के द्वारा बखूबी देखा जाता है हाँ आम आदमी के लिये इसे देखना असंभव ही है
क्या आपको मालूम है कि जंगल का राजा कहा जाने वाले शेर शार्दूल नामके (सेही चूहे या छोटे खरगोश जितने आकार वाला एक जानवर ) जानवर से उतना ही डरता है जैसे चूहा बिल्ली से डरता है ये शार्दूल किसी पेङ की नीची
डाल पर या किसी थोङे से ऊँचे स्थान से जम्प लगाकर शेर की गर्दन में अपने दांत गङा देता है शेर किसी तरह इससे छुटकारा नही पा सकता और अन्तः में ढेरों खून बह जाने से शेर मर जाता है शार्दूल उसका खून पीता है या क्यों शेर को ही मारता है इस बारे में मेरी जानकारी नहीं है .
कछवी अपने अंडो को समुद्र तट या तालाव आदि के किनारे देने के बाद उन्हें रेत में दबाकर अपने भोजन आदि की तलाश में निकल जाती है और अपने अंडो का निरंतर ध्यान करती है ये कार्य अंडो को सेकर गर्मी देने जैसा है..यदि किसी दुर्घटनावश कछवी की मृत्यु हो जाती है तो अंडे सङ जाते है
आप सोच रहे होंगे कि मेरा अध्यात्म विषय आज पशु पक्षियों की तरफ़ कैसा मुङ गया दरअसल इन सारी घटनाओं का जुङाव अध्यात्म से ही है बस आपको थोङा सोचने की जरूरत है .क्योंकि कैसा अदभुत खेल बनाया , मोह माया में जीव फ़ंसाया ...माया महा ठगिनी हम जानी..तिरगुन फ़ांस लिये कर डोले बोले मधुरी वानी .
तिरगुन फ़ांस यानी सत रज तम...अब आप समझ लो कोई धुरंधर ग्यानी ..जो पूरी तरह सत आचरण में है वो भी माया के दायरे से बाहर नहीं है .

कोई टिप्पणी नहीं:

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...