बुधवार, अप्रैल 28, 2010

राम कसौटी कसतहि रहई


रमैनी 64

काया कंचन जतन कराया, बहुत भांति कै मन पलटाया ।
जो सौ बार कहौं समुझाई, तइयो धरै छोडि नहिं जाई ।
जनके कहे जो जन रहि जाई, नवो निधि सिद्धि तिन पाई ।
सदा धर्म तेहि हृदया बसई, राम कसौटी कसतहि रहई ।
जोरि कसावै अंतै जाई, सो बाउर आपुहि बौराई ।

पडिगै फाँसी काल की, करहु आपनो सोच ।
संत निकट ही संत जा, मिल रहै पोचै पोच ।

                            रमैनी 65

आपन गुन को अवगुन कहहू, इहै अभाग जो तुम न बिचरहू ।
तू जियरा बहुते दुख पाया, जल बिनु मीन कौन सुख पाया?
चात्रिक जल हल आसे पासा, स्वांग धरै भवसागर आसा?
चात्रिक जल हल भरे जौ पासा, मेघ न बरसै चलै उदासा?
राम नाम इहै निज सारा, औरो झूठ सकल संसारा?
हरि उतंग तुम जाति पतंगा, यम घर कियो जीव के संगा ।
किंचित है सपने निधि पाई, हिय न अमाय कहँ धरो छिपाई?
हिय न समाय छोरि नहिं पारा, झूठा लोभ किनहु न बिचारा ।
स्मृति कीन्ह आपु नहिं माना, तरिवर छर छागर होय जाना ।
जीव दुरमति डोले संसारा, तेहि नहिं सूझै वार न पारा ।

अंध भया सब डोलई, कोई न करै विचार ।
कहा हमार माने नहीं, किमि छूटै भ्रम जार ।

                          रमैनी 66

सोई हित बंधू मोहि भावै, जात कुमारग मारग लावै ।
सो सयान मारग रहि जाई, करै खोज कबहूं न भुलाई ।
सो झूठा जो सुत कहँ तजई, गुरु की दया राम ते भजई ।
किं चित है एक तेज भुलाना, धन सुत देखि भया अभिमाना ।

दिया नखत तन कीन्ह पयाना, मंदिर भया उजार ।
मरिगा सो तो मरि गया, बांचे बाचनहार ।

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Agra, uttar pradesh, India
भारत के राज्य उत्तर प्रदेश के फ़िरोजाबाद जिले में जसराना तहसील के एक गांव नगला भादौं में श्री शिवानन्द जी महाराज परमहँस का ‘चिन्ताहरण मुक्तमंडल आश्रम’ के नाम से आश्रम है। जहाँ लगभग गत दस वर्षों से सहज योग का शीघ्र प्रभावी और अनुभूतिदायक ‘सुरति शब्द योग’ हँसदीक्षा के उपरान्त कराया, सिखाया जाता है। परिपक्व साधकों को सारशब्द और निःअक्षर ज्ञान का भी अभ्यास कराया जाता है, और विधिवत दीक्षा दी जाती है। यदि कोई साधक इस क्षेत्र में उन्नति का इच्छुक है, तो वह आश्रम पर सम्पर्क कर सकता है।