रविवार, मार्च 28, 2010

मुर्दा जी उठा .??..

एक बार एक राजा का लङका मर गया (कबीर के समय में ) था . राजा अपने लङके को बहुत चाहता था उसने अपने मंत्रियों आदि से कहा कि किसी भी तरह मेरे लङके को जिन्दा करवाओ अन्यथा में बहुत लोगों को फ़ाँसी लगवा दूँगा . मंत्री आदि ने राजा को समझाने का बहुत प्रयत्न किया कि राजन मरे हुये जिन्दा नही होते ..पर राजा (ये राजा विदेश की धरती पर हुआ है ) उनकी कोई बात सुनने को तैयार नहीं हुआ .तब
मंत्रियों ने विचार किया कि क्या किया जाय तो कुछ लोगों ने सुझाव दिया कि भारत में ऐसा सुना जाता है कि मुर्दे को जिन्दा कर देने वाले संत समय समय पर हुये हैं . वहाँ जाने पर कोई ऐसा संत मिल सकता
है . तो जब राजा की ये टीम भारत आयी तो उन दिनों कबीर का बोलबाला था सो राजा की ये टीम कबीर से मिली और उन्हें सारी बात बतायी . कबीर ने मना कर दिया कि ऐसा नही हो सकता कि कोई मुर्दा जी उठे ..पर वास्तव में यह कबीर के लिये चुटकी बजाने से भी
छोटा काम था ये बात संतों के ग्यान को गहराई से जानने वाले कम ही लोग जानते हैं . तब राजा की ये टीम कबीर साहब से प्रार्थना करके ये कहकर उनको बुला ले गयी कि आप चलकर राजा को समझा ही दें तो
निर्दोष लोग फ़ाँसी चढने से बच जाय . कबीर इसके लिये तैयार हो गये ...लेकिन कबीर ने जब वहाँ पहुँचकर राजा को समझाना चाहा तो पुत्रमोह से पीङित राजा उनकी एक भी बात सुनने को तैयार नहीं हुआ .तब कबीर ने उसके लङके की लाश रखकर लाश से कहा कि तुझे भगवान राम की कसम उठ जा लङका टस से
मस न हुआ फ़िर कबीर ने कहा कि तुझे क्रष्ण की कसम उठ जा लाश में कोई हरकत न हुयी फ़िर कहा कि तुझे
खुदा की कसम उठ जा लाश फ़िर भी ज्यों की त्यों रही फ़िर कहा कि तुझे ईसा की कसम उठ जा लाश में कोई हरकत न हुयी तब कबीर ने लङके की लाश में एक लात मारी और कहा कि चल कबीर कह रहा है उठ जा ...मरा हुआ लङका तुरन्त हाथ जोङकर उठ खङा हुआ ...अब तो वहाँ हंगामा हो गया . पहले तो लोग आश्चर्यचकित रह गये फ़िर कुछ लोग बिगङने लगे कि ये संत खुद को खुदा भगवान ईसा आदि से भी बङा समझता है तब कबीर ने विनम्रता से कहा कि मैंने तो पहले तुम्हारे भगवान अल्लाह आदि की दुहाई देकर ही इसे जिन्दा करना चाहा लेकिन ये नहीं माना तो मैंने सोचा कि मेरे नाम से उठ जाय और वो उठ गया तो इसमें मेरा क्या दोष ..फ़िर लोग शांत हो गये...वास्तव में संतों की महिमा निराली है और उनका भेद जानना कठिन ही नही असम्भव है .

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