रविवार, मार्च 28, 2010

राजा या भिखारी ....??....

बहुत कम लोग ये बात जानते होंगे कि सिकन्दर महान
के नाम से प्रसिद्ध कई देशों को जीत लेने वाला राजा कबीर का शिष्य था . एक बार जब सिकन्दर की सवारी जा रही थी .फ़क्कङ कबीर अपनी मौज में रास्ते में लेटे हुये थे .कुछ सिपाहियों ने कहा ..ए फ़कीर उठ राजा की सवारी जा रही है . कबीर ने मौज में ही जबाब दिया कहाँ का राजा वह तो एकदम भिखारी है.. सिपाहियों ने सिकन्दर से जाकर कहा कि हजूर आपको एक फ़कीर भिखारी बता रहा है . सिकन्दर बुद्धिमान भी था उसने सोचा कि जिस सिकन्दर का डंका चारों ओर
बज रहा है उससे भिखारी कहने की हिम्मत किसी साधारण आदमी की नहीं हो सकती जरूर कोई खास ही बात है उसने कबीर के पास आकर कहा कि में आपको किस तरह से भिखारी नजर आता हूँ..कबीर ने कहा कि तू इतने देश जीत चुका फ़िर भी तेरी भूख नहीं मिटी तुझसे बङा भिखारी कौन होगा फ़िर कबीर का उससे आत्मग्यान पर सत्संग हुआ और वह कबीर के पैरों पर गिर पङा तथा बाद में उनका शिष्य भी बना .
विशेष- ये बात भी बहुत कम लोग जानते होंगे कि मथुरा व्रन्दावन में सबसे पहले क्रष्ण जन्मभूमि आदि मंदिरों का निर्माण अकबर ने कराया था . तानसेन ने जब अपने गुरु हरिदास के बारे में बताया तो अकबर उनसे मिलने गया और ग्यान भी लिया तथा बाद में उसी ने सबसे पहले मंदिरों का निर्माण कराया बाद में समय समय पर अनेक राजाओं ने मंदिर निर्माण में योगदान दिया ये लेख आपको मेरे ब्लोग्स पर कहीं मिल जायेगा .

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