रविवार, मार्च 28, 2010

क्या कहि लीजै नाँव


                           रमैनी 6

बरनहु कौन रूप औ रेखा, दूसर कौन आहि जो देखा?
ओ ओंकार आदि नहिं वेदा, ताकर कौन कहहु कुल भेदा ।
नहिं तारागन नहिं रवि चंदा, नहिं कुछ होत पिता के बिंदा ।
नहिं जल नहिं थल नहिं थिर पवना, को धरे नाम हुकुम को बरना ।
नहिं कछु होत दिवस अरु राती । ताकर कहहुँ कवन कुल जाती ।

सून्य सहज मन सुमिरते, प्रगट भई एक जोति ।
ताहि पुरुष की मैं बलिहारी, निरालंब जो होत?

                                रमैनी 7

जहिया होत पवन नहिं पानी, तहिया सृष्टि कौन उतपानी ।
तहिया होत कली नहिं फूला, तहिया होत गर्भ नहिं मूला ।
तहिया होत न विद्या वेदा, तहिया होत सब्द नहिं खेदा ।
तहिया होत पिंड नहिं बासू, ना धर धरनि न गगन अकासू ।
तहिया होति न गुरू न चेला, गम्य अगम्य न पंथ दुहेला?

अविगति की गति क्या कहौं, जाके गाँव न ठाँव ।
गुन विहीना पेखना, क्या कहि लीजै नाँव ।

                          रमैनी 8

तत्वमसी इनके उपदेसा, ई उपनिषद कहैं संदेसा?
ये निश्चय इनको बङ भारी, वाही को बरने अधिकारी ।
परम तत्व का निज परवाना, सनकादिक नारद सुख माना ।
याग्यवलक औ जनक सँबादा, दत्तात्रेय वहै रस स्वादा ।
वहै वसिष्ठ राम मिल गाई, वहै कृष्न ऊधव समुझाई ।
वही बात जे जनक दृढाई, देह धरे विदेह कहाई?

कुल मर्यादा खोय के, जियत मुआ नहिं होय ।
देखत जो नहिं देखिया, अदृष्ट कहावे सोय?

                          रमैनी 9

बाँधे अस्ठ कस्ट नौ सूता, जम बांधे अंजनी के पूता ।
जम के बांधने बांधी जनी, बांधे सृष्टि कहां लौ गनी ।
बाँधे देव तैंतीस करोरी, सुमिरत बंद लोह गै तोरी ।
राजा सुमिरै तुरिया चढी, पंथी सुमिरै मान लै बढी ।
अर्थ विहीना सुमिरै नारी, परजा सुमिरै पुहुमी झारी?

बंदि मनावे सो फल पावे, बंदि दिया सो देव ।
कहे कबीर सो ऊबरे, जो निसि दिन नामहिं लेव ।


एक टिप्पणी भेजें

WELCOME

मेरी फ़ोटो
Agra, uttar pradesh, India
भारत के राज्य उत्तर प्रदेश के फ़िरोजाबाद जिले में जसराना तहसील के एक गांव नगला भादौं में श्री शिवानन्द जी महाराज परमहँस का ‘चिन्ताहरण मुक्तमंडल आश्रम’ के नाम से आश्रम है। जहाँ लगभग गत दस वर्षों से सहज योग का शीघ्र प्रभावी और अनुभूतिदायक ‘सुरति शब्द योग’ हँसदीक्षा के उपरान्त कराया, सिखाया जाता है। परिपक्व साधकों को सारशब्द और निःअक्षर ज्ञान का भी अभ्यास कराया जाता है, और विधिवत दीक्षा दी जाती है। यदि कोई साधक इस क्षेत्र में उन्नति का इच्छुक है, तो वह आश्रम पर सम्पर्क कर सकता है।

Follow by Email