बुधवार, अगस्त 11, 2010

भगवान के घर देर है । अन्धेर नहीं है ।

आना है तो आ राह में कुछ देर नहीं है ।
भगवान के घर देर है । अन्धेर नहीं है ।
जब तुझसे न सुलझे तेरे उलझे हुये फ़न्दे ।
भगवान के इंसाफ़ पर सब छोड दे बन्दे ।
आना है तो आ राह में कुछ देर नहीं है ।
भगवान के घर देर है । अन्धेर नहीं है ।
खुद ही तेरी मुश्किल । को वो आसान करेगा । जो तू नही कर पाया । वो भगवान करेगा ।
आना है तो आ राह में कुछ देर नहीं है ।
भगवान के घर देर है । अन्धेर नहीं है ।
कहने की जरूरत नहीं आना ही बहुत है ।
इस दर पर तेरा शीश झुकाना ही बहुत है ।
जो कुछ है तेरे दिल में वो उसको भी खबर है । बन्दे तेरे हर हाल पर मालिक की नजर है ।
आना है तो आ राह में कुछ देर नहीं है ।
भगवान के घर देर है । अन्धेर नहीं है ।
बिन मांगे भी मिलती हैं यहां मन की मुरादें ।
दिल साफ़ है जिनका वो खुद ही पधारें ।
मिलता है जहां न्याय । वो दरवार यही है । संसार की सबसे बडी सरकार यही है ।
आना है तो आ राह में कुछ देर नहीं है । भगवान के घर देर है । अन्धेर नहीं है ।
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" जाकी रही भावना जैसी । हरि मूरत देखी तिन तैसी । " " सुखी मीन जहाँ नीर अगाधा । जिम हरि शरण न एक हू बाधा । " विशेष--अगर आप किसी प्रकार की साधना कर रहे हैं । और साधना मार्ग में कोई परेशानी आ रही है । या फ़िर आपके सामने कोई ऐसा प्रश्न है । जिसका उत्तर आपको न मिला हो । या आप किसी विशेष उद्देश्य हेतु कोई साधना करना चाहते हैं । और आपको ऐसा लगता है कि यहाँ आपके प्रश्नों का उत्तर मिल सकता है । तो आप निसंकोच सम्पर्क कर सकते हैं ।

1 टिप्पणी:

Sonal ने कहा…

bahut hi acha likha hai aapne..
shukriya share karne k liye..

Meri Nayi Kavita aapke Comments ka intzar Kar Rahi hai.....

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