मंगलवार, जनवरी 31, 2012

सुन्दरी से सुनही बनी सुन साहब के खेल

पण्डित और मशालची । दोनों सूझे नाहिं । औरन करें चाँदना । आप अँधेरे माँहि ।
करनी तज कथनी कथें । अज्ञानी दिन रात । कूकर ज्यों भूँकत फ़िरे । सुनी सुनाई बात ।
कथनी के शूरे घने । कथे अडम्बर ज्ञान । बाहर जबाब आवे नहीं । लीद करें मैदान ।
चण्डाली के चौक में । सतगुरु बैठे जाये । चौंसठ लाख गारत गये । दो रहे सतगुरु पाये ।
भङवा भङवा सब कहें । जानत नाहीं खोज । गरीब कबीर करम से । बाँटत सर का बोझ ।
नाम बिना सूना नगर । पङया सकल में शोर । लूट न लूटी  बन्दगी । हो गया हँसा भोर ।
अदली आरती अदल अजूनी । नाम बिना सब काया सूनी ।
झूठी काया खाल लुहारा । इङा पिंगला सुषमना द्वारा ।
कृतघ्नी भूले नर लोई । जा घट निश्चय नाम न होई । सो नर कीट पतंग भुजंगा । चौरासी में धर है अंगा ।
न जाने ये काल की कर डारे । किस विधि हल जा पासा वे ।
जिन्हा दे सिर ते मौत खुङगदी । उन्हानूँ केङा हाँसा वे ।
साधु मिले साडी शादी ( खुशी ) होंदी । बिछङ दा दिल गिरि ( दुख ) वै ।
अखदे नानक सुनो जिहाना । मुश्किल हाल फ़कीरी वे ।
बिनु उपदेश अचम्भ है । क्यों जीवत है प्राण । बिनु  भक्ति कहाँ ठौर है । नर नहीं पाषाण ।
एक हरि के नाम बिनु । नारि कुतिया हो । गली गली भौंकत फ़िरे । टूक न डारे कोय ।
बीबी परदे रही थी । डयौङी लगती बार । गात उघारे फ़िरती है । बन कुतिया बाजार ।
नकबेसर नक से  बनी । पहनत हार हमेल । सुन्दरी से सुनही ( कुतिया ) बनी । सुन साहब के खेल ।
राजा जनक से नाम ले । कीन्ही हरि की सेव । कह कबीर बैकुण्ठ में । उलट मिले शुकदेव ।
सतगुरु के उपदेश का । लाया एक विचार । जो सतगुरु मिलते नहीं । जाता नरक द्वार ।
नरक द्वार में दूत सब । करते खैंचातान । उनते कबहूँ न छूटता । फ़िर फ़िरता चारों खान ।
चार खान में भरमता । कबहूँ न लगता पार । सो फ़ेरा सब मिट गया । सतगुरु के उपकार ।
गुरु बङे गोविन्द से । मन में देख विचार । हरि सुमरे सो रह गये । गुरु भजे हुये पार ।
गंगा काठे घर करे । पीवे निर्मल नीर । मुक्ति नहीं हरि नाम बिन । सतगुरु कहें कबीर ।
तीरथ कर कर जग मुआ । उङे पानी नहाय । राम नाम ना जपा । काल घसीटे जाय ।
पीतल का ही थाल है । पीतल का लोटा । जङ मूरत को पूजते । फ़िर आवेगा टोटा ।
पीतल चमचा पूजिये । जो थाल परोसे । जङ मूरत किस काम की । मत रहो भरोसे ।
भूत रमे सो भूत है । देव रमे सो देव । राम रमे सो राम है । सुनो सकल सुर मेव ।
कबीर इस संसार को । समझाऊँ कै बार । पूँछ जो पकङे भेङ की । उतरा चाहे पार ।
गुरु बिनु यज्ञ हवन जो करहीं । मिथ्या जाय कबहूँ न फ़लहीं ।
माई मसानी शेर शीतला । भैरव भूत हनुमन्त । परमात्मा उनसे दूर है । जो इनको पूजन्त ।
सौ वर्ष तो गुरु की सेवा । एक दिन आन उपासी । वो अपराधी आत्मा । परे काल की फ़ाँसी ।
गुरु को तजै । भजै जो आना । ता पशुवा को । फ़ोकट ज्ञाना ।
देवी देव ठाङे भये । हमको ठौर बताओ । जो मुझको पूजे नहीं । उनको लूटो खाओ ।
काल जो पीसे पीसना । जोरा है पनिहार । ये दो असल मजूर हैं । सतगुरु के दरबार ।
साथी हमारे चले गये । हम भी चालनहार । कोए कागज में बाकी रही । ताते लागी वार ।
देह पङी तो क्या हुआ । झूठा सभी पटीट । पक्षी उङया आकाश कूँ । चलता कर गया बीट ।
बेटा जाया खुशी हुयी । बहुत बजाये थाल । आना जाना लग रहा । ज्यों कीङी का नाल ।
पतझङ आवत देखकर । वन रोवे मन माँहि । ऊँची डाली पात थे । अब पीले हो जाँहि ।
पात झङता यूँ कहे । सुन भई तरुवर राय । अब के बिछुङे नहीं मिला । कहाँ गिरूँगा जाय ।
तरुवर कहता पात से । सुनो पात एक बात । यहाँ की यही रीत है । एक आवत एक जात ।
पर द्वारा स्त्री का खोले । सत्तर जन्म अँधा हो डोले । सुरापान मध माँसाहारी । गबन करें । भोगे पर नारी ।
सत्तर जन्म कटत हैं शीश । साक्षी साहब हैं जगदीश ।
पर नारी न परसियो । मानो वचन हमार । भवन चर्तुदश तासु सिर । त्रिलोकी का भार ।
पर नारी न परसियो । सुनो शब्द सलतंत । धर्मराय के खम्ब से । अर्ध मुखी लटकंत ।
गुरु की निन्दा । सुने जो काना । ताको निश्चय नरक निदाना ।
अपने मुख जो निन्दा करहीं । शूकर श्वान गर्भ में परहीं ।
सन्त मिलन को जाईये । दिन में कई कई बार । आसोजा का मेह ज्यों । घना करे उपकार ।
कबीर दर्शन साधु का । साहिब आवे याद । लेखे में वो ही घङी । बाकी के दिन बाद ।
कबीर दर्शन साधु का ।  मुख पर बसे सुहाग । दर्श उन्हीं को होत हैं । जिनके पूरन भाग ।
इच्छा कर मारे नहीं । बिन इच्छा मर जाये । कह कबीर तास का । पाप नहीं लगाये ।
गुरु द्रोही की पेड पर । जो पग आवे वीर । चौरासी निश्चय पङे । सतगुरु कहें कबीर ।
जान बूझ सांची तजे । करें झूठ से नेह । जाकी संगत हे प्रभु । सपने में ना  देय ।
माँस भखे और मद पिये । धन वैश्या सों खायें । जुआ खेल चोरी करे । अन्त समूला जाय ।
यह अर्ज गुफ़तम पेश तो । दर कून करतार । हक्का कबीर करीम तू । बे एव परवर दिगार ।
( श्री गुरु ग्रन्थ साहिब । पृष्ठ 721 महला 1 । राग तिलंग )

कोई टिप्पणी नहीं:

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...