शनिवार, नवंबर 26, 2011

अष्टावक्र गीता वाणी ध्वनि स्वरूप - 31


सुखदुःखे जन्ममृत्यू दैवादेवेति निश्चयी । साध्यादर्शी निरायासः कुर्वन्नपि न लिप्यते । 11-4
सुख दुःख । और । जन्म मृत्यु । प्रारब्धवश ( पूर्वकृत कर्मों के अनुसार ) हैं । ऐसा । निश्चित रूप से जानने वाला । फल की इच्छा । न रखने वाला । सरलता से । कर्म करते हुए भी । उनसे लिप्त नहीं होता है । 4
चिन्तया जायते दुःखं नान्यथेहेति निश्चयी । तया हीनः सुखी शान्तः सर्वत्र गलितस्पृहः । 11-5
चिंता से ही । दुःख । उत्पन्न होते हैं । किसी । अन्य कारण से नहीं । ऐसा । निश्चित रूप से । जानने वाला । चिंता से रहित होकर । सुखी । शांत । और सभी इच्छाओं से । मुक्त हो जाता है । 5
नाहं देहो न मे देहो बोधोऽहमिति निश्चयी । कैवल्यं इव संप्राप्तो न स्मरत्यकृतं कृतम । 11-6
न मैं । यह शरीर हूँ । और न यह । शरीर मेरा है । मैं ज्ञानस्वरुप हूँ । ऐसा । निश्चित रूप से । जानने वाला । जीवन मुक्ति को । प्राप्त करता है । वह किये हुए ( भूतकाल ) और न किये हुए ( भविष्य के ) कर्मों का । स्मरण नहीं करता है । 6
आबृह्मस्तंबपर्यन्तं अहमेवेति निश्चयी । निर्विकल्पः शुचिः शान्तः प्राप्ताप्राप्तविनिर्वृतः । 11-7
तृण से लेकर । बृह्मा तक । सब कुछ । मैं ही हूँ । ऐसा । निश्चित रूप से । जानने वाला । विकल्प ( कामना ) रहित । पवित्र । शांत । और प्राप्त अप्राप्त से । आसक्ति रहित । हो जाता है । 7
अष्टावक्र त्रेता युग के महान आत्मज्ञानी सन्त हुये । जिन्होंने जनक को कुछ ही क्षणों में आत्म साक्षात्कार कराया । आप भी  इस दुर्लभ गूढ रहस्य को इस वाणी द्वारा आसानी से जान सकते हैं । इस वाणी को सुनने के लिये नीचे बने नीले रंग के प्लेयर के प्ले > निशान पर क्लिक करें । और लगभग 3-4 सेकेंड का इंतजार करें । गीता वाणी सुनने में आपके इंटरनेट कनेक्शन की स्पीड पर उसकी स्पष्टता निर्भर है । और कम्प्यूटर के स्पीकर की ध्वनि क्षमता पर भी । प्रत्येक वाणी 1 घण्टे से भी अधिक की है । इस प्लेयर में आटोमेटिक ही वाल्यूम 50% यानी आधा होता है । जिसे वाल्यूम लाइन पर क्लिक करके बढा सकते हैं । इस वाणी को आप डाउनलोड भी कर सकते हैं । इसके लिये प्लेयर के अन्त में स्पीकर के निशान के आगे एक कङी का निशान या लेटे हुये  8 जैसे निशान पर क्लिक करेंगे । तो इसकी लिंक बेवसाइट खुल जायेगी । वहाँ डाउनलोड आप्शन पर क्लिक करके आप इस वाणी को अपने कम्प्यूटर में डाउनलोड कर सकते हैं । ये वाणी न सिर्फ़ आपके दिमाग में अब तक घूमते रहे कई प्रश्नों का उत्तर देगी । बल्कि एक  मुक्तता का अहसास भी करायेगी । और तब हर कोई अपने को बेहद हल्का और आनन्द युक्त महसूस करेगा ।



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