शनिवार, नवंबर 26, 2011

अष्टावक्र गीता वाणी ध्वनि स्वरूप - 35


कर्मनैष्कर्म्यनिर्बन्धभावा देहस्थयोगिनः ।  संयोगायोगविरहादहमासे यथासुखम । 13-4
शरीर भाव में स्थित योगियों के लिए कर्म और अकर्म रूपी बंधनकारी भाव होते हैं । पर संयोग और वियोग की प्रवृत्तियों को छोड़कर । सभी स्थितियों में । मैं सुखपूर्वक विद्यमान हूँ । 4
अर्थानर्थौ न मे स्थित्या गत्या न शयनेन वा ।  तिष्ठन गच्छन स्वपन तस्मादहमासे यथासुखम । 13-5
विश्राम । गति । शयन । बैठने । चलने और स्वप्न में वस्तुतः मेरे लाभ और हानि नहीं हैं । अतः सभी स्थितियों में । मैं सुखपूर्वक विद्यमान हूँ । 5
स्वपतो नास्ति मे हानिः सिद्धिर्यत्नवतो न वा । नाशोल्लासौ विहायास्मदहमासे यथासुखम । 13-6
सोने में मेरी हानि नहीं है । और उद्योग । अथवा अनुद्योग में । मेरा लाभ नहीं है । अतः हर्ष और शोक की । प्रवृत्तियों को छोड़कर । सभी स्थितियों में । मैं सुखपूर्वक विद्यमान हूँ । 6
सुखादिरूपा नियमं भावेष्वालोक्य भूरिशः । शुभाशुभे विहायास्मादहमासे यथासुखम । 13-7
सुख । दुःख आदि स्थितियों के क्रम से आने के नियम पर बार बार विचार करके । शुभ ( अच्छे ) और अशुभ ( बुरे ) की  प्रवृत्तियों को छोड़कर । सभी स्थितियों में । मैं सुखपूर्वक विद्यमान हूँ । 7


अष्टावक्र त्रेता युग के महान आत्मज्ञानी सन्त हुये । जिन्होंने जनक को कुछ ही क्षणों में आत्म साक्षात्कार कराया । आप भी  इस दुर्लभ गूढ रहस्य को इस वाणी द्वारा आसानी से जान सकते हैं । इस वाणी को सुनने के लिये नीचे बने नीले रंग के प्लेयर के प्ले > निशान पर क्लिक करें । और लगभग 3-4 सेकेंड का इंतजार करें । गीता वाणी सुनने में आपके इंटरनेट कनेक्शन की स्पीड पर उसकी स्पष्टता निर्भर है । और कम्प्यूटर के स्पीकर की ध्वनि क्षमता पर भी । प्रत्येक वाणी 1 घण्टे से भी अधिक की है । इस प्लेयर में आटोमेटिक ही वाल्यूम 50% यानी आधा होता है । जिसे वाल्यूम लाइन पर क्लिक करके बढा सकते हैं । इस वाणी को आप डाउनलोड भी कर सकते हैं । इसके लिये प्लेयर के अन्त में स्पीकर के निशान के आगे एक कङी का निशान या लेटे हुये  8 जैसे निशान पर क्लिक करेंगे । तो इसकी लिंक बेवसाइट खुल जायेगी । वहाँ डाउनलोड आप्शन पर क्लिक करके आप इस वाणी को अपने कम्प्यूटर में डाउनलोड कर सकते हैं । ये वाणी न सिर्फ़ आपके दिमाग में अब तक घूमते रहे कई प्रश्नों का उत्तर देगी । बल्कि एक  मुक्तता का अहसास भी करायेगी । और तब हर कोई अपने को बेहद हल्का और आनन्द युक्त महसूस करेगा ।



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