बुधवार, अप्रैल 28, 2010

कि जी भर के संभोग sex करो तो

मेरे एक मित्र हैं राधारमण गौतम और अब तो मेरे गुरुभाई भी हैं ये इस समय तो आगरा में रह रहे हैं लेकिन कुछ समय पहले भरतपुर में रहते थे . राधारमण मुम्बई फ़िल्म इंडस्ट्री में प्रयासरत थे और इनको सीरियल में काम भी मिलने लगा था कि तभी इनके फ़ादर लिवरोसिस नामक बीमारी से पीङित हो गये और लगभग सारी जमापूंजी उनके इलाज में खर्च हो गयी और राधारमण को अपना कैरियर बीच में ही छोङकर घर आना पङा क्योंकि राधारमण के
छोटे छोटे चार बच्चे हैं और घर पर जिम्मेदारी संभालने वाला कोई नहीं है . मुझसे बातचीत के दौरान राधारमण ने एक दिलचस्प बात
बताई कि भरतपुर के उनके दोस्त रजनीश के संभोग से समाधि तक वाक्य का अर्थ यों लेते है कि जी भर के संभोग sex करो तो
समाधि या ग्यान की प्राप्त होगा ये सिर्फ़ उन कुछ लोगों की बात
नहीं मेरी सत्संग चर्चा के दौरान कई लोगों ने यह बात कही कि
अधिक सेक्स करना सुख को प्राप्त होना है.
मैंने कई बार यह बात कही है कि आप जिस बात को लेकर भ्रमित
हो उसके शब्दों पर ध्यान दो काफ़ी रहस्य सुलझ जायेगा .जैसे संभोग को इस तरह कर लो समभोग से समाधि यानी इस का अर्थ ये हुआ कि भोगों में तुम सम हो जाओ अर्थात उनके होने या न होने का तुम पर असर न हो तो ये समाधि अवस्था की शुरुआत हो जायेगी..हाँ लेकिन रजनीश ने ये अवश्य कहा है कि यदि तुम्हारी कोई इच्छाये प्रवल हैं तो उनका दमन करने की बजाय उनकी पूर्ति कर लेना ही बेहतर हैं क्योंकि ग्यान मार्ग में दबी हुयी इच्छायें बहुत बङी बाधायें हैं पर लोग कुछ का कुछ समझ लेते हैं .
एक महात्मा ने कहा कि दूसरों को गढ्ढे से निकालना सबसे बङा पुण्य है दूसरे दिन एक आदमी ने आकर कहा महाराज पूरे दिन तलाश करता रहा पर गढ्ढे में गिरा कोई आदमी ही नहीं मिला . एक बार एक शिक्षक ने बच्चों से कहा कि अन्धे या वृद्ध आदमी को सङक पार कराना हमारा कर्तव्य है और हम सब को प्रतिदिन एक भला कार्य
करना चाहिये .दूसरे दिन उसने बच्चों से पूछा कि क्या किसी ने भला कार्य किया है .एक बच्चे ने कहा कि हाँ मैंने किया .मैंने एक बूढी औरत को सङक पार करायी .टीचर ने कहा फ़िर तो उसने तुम्हें खूब दुआयें दी होगी बच्चे ने कहा कि नहीं उसने मुझे गालियां दी क्यों कि वो सङक के पार जाना ही नहीं चाहती थी मैंने भला कार्य करने के लिये जबरन उसे सङक पार करायी . वो तो खैर बच्चा था पर हमारी अपनी भी समझ कहीं न कहीं ऐसी ही है इसीलिये हम सच के बेहद नजदीक होते हुये भी उससे दूर होते हैं .

3 टिप्‍पणियां:

Suman ने कहा…

nice

'उदय' ने कहा…

...रोचक !!!

Eskay zee ने कहा…

Acharya Rajnish ne sambhog ka sirf udaharan hi diya hai ki jaise sambhog ki charam seema ke waqt hamari anaya lagbhag samast kiryayen thahar jati hain, uisi parkaar se samadhi mein bhi hota hai. Unhon ne sirf samadhi awastha hi bataee hai, sambhog ki charam seema ke waqt ka udaharan dekar, kyonki sambhog ka sabhi ko experience hota hai. plz try again & again 2 understand & follow 2 acharya.

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